बातें भूल गयी हैं लेकिन,
एहसास नहीं भूला है आज भी।
तुझसे दूरी के जब,
तुझसे दूरी के जब,
एहसास में भी खुश रहते थे॥
तस्वीर तेरी इन आँखों में ,
तस्वीर तेरी इन आँखों में ,
धुंधली न कहीं ये पड़ जाये।
तेरी एक झलक पाने की ख़ातिर,
फ़िरते फ़िरते रहते थे॥
सोते तो नींद नहीं आती,
जगते तो आँखे दुखती थी।
दिन कैसे सारा बीत गया,
जाने क्या करते रहते थे॥
पतझड़ बीता सावन आया,
सावन भी जैसे पतझड़ था।
हर ख़्वाब मेरे सच होने से पहले,
जब टूट कर गिरते रहते थे॥
करवट ली ऐसी जीवन ने मेरे,
खुशियाँ जैसे हो रूठ गयी।
एक ख़ुशी कहीं तो मिल जाये,
बस दुआ ये करते रहते थे॥
क्यूँ उतरी इतनी गहराई में,
जब तैरना न सीखा मैंने।
बस यही एक सवाल हम अक्सर,
ख़ुद से पूछा करते रहते है॥
अब तक की सारी बातें जो,
अल्फाज़ो में मैंने है बदली।
मत पूछो यारो मुझसे,
ये दर्द कहा छुपे रहते थे॥
--मनीषा--
फ़िरते फ़िरते रहते थे॥
सोते तो नींद नहीं आती,
जगते तो आँखे दुखती थी।
दिन कैसे सारा बीत गया,
जाने क्या करते रहते थे॥
पतझड़ बीता सावन आया,
सावन भी जैसे पतझड़ था।
हर ख़्वाब मेरे सच होने से पहले,
जब टूट कर गिरते रहते थे॥
करवट ली ऐसी जीवन ने मेरे,
खुशियाँ जैसे हो रूठ गयी।
एक ख़ुशी कहीं तो मिल जाये,
बस दुआ ये करते रहते थे॥
क्यूँ उतरी इतनी गहराई में,
जब तैरना न सीखा मैंने।
बस यही एक सवाल हम अक्सर,
ख़ुद से पूछा करते रहते है॥
अब तक की सारी बातें जो,
अल्फाज़ो में मैंने है बदली।
मत पूछो यारो मुझसे,
ये दर्द कहा छुपे रहते थे॥
--मनीषा--
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