एक वक्त ऐसा आयेगा,
जब हर सच नज़र आ जायेगा।
क्या है बन्द दरवाजों के पीछे,
हर राज़ तब खुल जाये गा॥
जो होते है आज हमसे ख़फा,
कल खुद की ही बातों पर बस अफसोस करेंगें।
करेंगें हमारी तरह ही वो कल बातें,
अपना इतना असर तो उन पर बाकी रह जायेगा॥
उन्हें दुनियाँ की फितरतों से बचाने की कोशिश में,
खुद अपने ही जाल में उलझते गये हम,
जो देखते है श़क की निगाहों से आज मुझको,
कल खुद की निगाहों से उनका यकीं टूट जायेगा॥
जब हर सच नज़र आ जायेगा।
क्या है बन्द दरवाजों के पीछे,
हर राज़ तब खुल जाये गा॥
जो होते है आज हमसे ख़फा,
कल खुद की ही बातों पर बस अफसोस करेंगें।
करेंगें हमारी तरह ही वो कल बातें,
अपना इतना असर तो उन पर बाकी रह जायेगा॥
उन्हें दुनियाँ की फितरतों से बचाने की कोशिश में,
खुद अपने ही जाल में उलझते गये हम,
जो देखते है श़क की निगाहों से आज मुझको,
कल खुद की निगाहों से उनका यकीं टूट जायेगा॥
--मनीषा--
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