Sunday, 5 February 2012

क्यूँ नही आता....

बातें वो दिल में रखते है,
मगर कुछ कह नहीं पाते।
सलीका-ए-इश्क़ भी उनको,
जताना क्यूँ नहीं आता॥

नज़र मिलती है जब उनकी,
मेरी नज़रों से एक पल को।
हुयी जो दिल में एक हलचल,
सुनाना क्यूँ नहीं आता॥

कभी वो देखते मुझको,
कभी मैं देखती उनको।
मगर जो दिल में बातें है,
बताना क्यूँ नहीं आता॥

कशिश है उनके भी दिल में,
कशिश है मेरे भी दिल में।
मगर जो दिल की दूरी है,
मिटाना क्यूँ  नही आता॥

 --मनीषा साहू 'पंछी'--