Wednesday, 23 April 2014

मुकद्दर हो न हो संग मेरे,
तुझे अपना बनाना है।
भले कितना खफ़ा हो तू,
तुझे फ़िर भी मनाना है॥

ये दिल न सोचता तुझको,
कभी ऐसा नहीं होता।
तू सपनो में ना आये,
कभी ऐसा नहीं होता॥

शिकायतें हो भले लाखों,
भले तू दूर हो मुझसे।
तेरे ही दिल के कोनें में,
घर अपना बनाना है॥

लम्हें तो बीत जाते है, 
मगर ये दिन नहीं कटते।
खुशियाँ तो जा रहीं पल पल,
मगर ये ग़म नहीं घटते॥

किसी भी राह चल कर के,
अब तो मंज़िल को पाना है।
तेरे प्यार के सागर में,
अब खुद को डुबाना है॥

कि इतना हो करम मुझपे,
ये मुश्किलें दूर हो जाये।
कि तुझे पाने की चाहत में,
खु़दा को आज़माना है॥

--मनीषा साहू 'पंछी'--

Monday, 31 March 2014

दुविधा रहे जो भीतर मन के कछु भीतर जाये।
कोरा मन को कीजियेतब भीतर प्रेम समाये॥

--मनीषा साहू 'पंछी'--


Friday, 21 February 2014

"Whenever you love someone, you don't love him or her, you just love your own choice nothing else."

--मनीषा साहू 'पंछी'--

Thursday, 20 February 2014

"Love is blind until you fell in love."

--मनीषा साहू 'पंछी'--