My Creations....
Monday, 31 March 2014
दुविधा
रहे
जो
भीतर
मन
के
,
न
कछु
भीतर
जाये।
कोरा
मन
को
कीजिये
,
तब
भीतर
प्रेम
समाये॥
--
मनीषा
साहू
'
पंछी
'--
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