नव वर्ष का हुआ आगमन,
बीत गया देखो फिर एक साल।
प्रवेश करो नये साल में फिर से,
मिटाकर सारे द्वेष, विकार ॥
नयी किरन के साथ है आया
नयी खुशियोँ का पता बताने।
नया सवेरा, नही अँधेरा
नया सौभाग्य बैठा सिरहाने ॥
करो कामना मंगल की तुम,
मंगल होंगें सारे काज।
संशय और अज्ञान मिटाकर,
कर लो नभ में तुम परवाज ॥
नये रंगों से रंगे ये जीवन,
नयी खुशियोँ की भेंट के साथ।
नये पुष्प सा खिले ये उपवन,
नये सवेरे और किरन के साथ ॥
नयी खुशियोँ की भेंट के साथ।
नये पुष्प सा खिले ये उपवन,
नये सवेरे और किरन के साथ ॥
--मनीषा--
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