Friday, 5 August 2011

अक़्स है ऐसा उसका,
होता नही ओझल वो एक पल के लिये।
हर घङी रहता है सामने वो नजरों के
जैसे मेरा हो गया हो वो हर पल के लिये॥

नींदों में भी वो पास है मेरे,
ख़्वाबों में भी उसका साथ है।
बन्द आँखों से भी नजर आता,
हर वक्त उसका ही एहसास है॥

हर प्यार लुटा दूँ उस पर,
हर गम को उसके चुरा लूँ।
हर आईने में हो सूरत उसकी,
हर लम्हें में उसको बसा लूँ॥

तमन्ना है उसे पाने की,
हर दर्द अपना भुला जाने की।
क्या सुनाऊँ उसे हाल-ए-दिल अपना,
जो कोशिश में है मुझे भूल जाने की॥

                         --मनीषा--