सही गलत का अंतर समझाया,
दुनियां से जीतने का गुर सिखलाया।
अपने ज्ञान के दीपक से जिसने,
मेरे अज्ञान के अँधेरे को है मिटाया॥
ऐसे गुरु का गुणगान करूँ मैं,
उसकी महिमा का क्या बखान करूँ मैं।
जिसका हाथ रहे सर पर जब,
हर मुश्किल को आसान करूँ मैं॥
जलता रहे सतत ये ज्ञान का दीपक,
हम सबको अलौकिक करे निरंतर।
हम सबकी है ये मंगलकामना,
शिक्षक दिवस की शुभ शुभकामना॥
--मनीषा साहू 'पंछी'--
दुनियां से जीतने का गुर सिखलाया।
अपने ज्ञान के दीपक से जिसने,
मेरे अज्ञान के अँधेरे को है मिटाया॥
ऐसे गुरु का गुणगान करूँ मैं,
उसकी महिमा का क्या बखान करूँ मैं।
जिसका हाथ रहे सर पर जब,
हर मुश्किल को आसान करूँ मैं॥
जलता रहे सतत ये ज्ञान का दीपक,
हम सबको अलौकिक करे निरंतर।
हम सबकी है ये मंगलकामना,
शिक्षक दिवस की शुभ शुभकामना॥
--मनीषा साहू 'पंछी'--
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