हकीक़त में न सही,
पर सपनों में तो करीब़ आ जाया करो।
दिल में न सही,
आखों में तो समां जाया करो।
पर सपनों में तो करीब़ आ जाया करो।
दिल में न सही,
आखों में तो समां जाया करो।
एक झलक दिखला के अपनी,
मेरी आँखों की प्यास बुझा जाओ।
न मिलो हकीक़त में तुम,
पर कभी तो ख्वाबों में आ जाओ।
तरस गयी हैं आँखें एक झलक को तुम्हारी,
तङपता है दिल तुम्हें महसूस करने को।
जाने कब से नही सुनी आवाज भी तुम्हारी,
हौसला भी नही रहा अब और सितम सहने को।
क्यूँ छोङ दिया मझधार में मुझे,
डूब जाने देते या साथ का वादा ही किया होता।
आ गयी है जिन्दगी मेरी एक ऐसे दोराहे पर,
शायद किसी एक राह पर मंजिल का निशां होता।
प्यार की रस्में हम निभाते चले गये,
और दर्द का आईना तुमने दिखा दिया।
उम्मीद तुम्हें पाने की एक, दिल मेँ रखकर,
खुद अपनी ही जिन्दगी को अपने हाथ जला दिया ।।
--मनीषा--
1 comment:
hmmm...........m speechless........very touching.....!!!
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