हो कौन तुम मेरे,
क्यों मुझे याद आते हो।
क्या रिश्ता है मेरा तुमसे,
क्यों इस कद़र दिल को जलाते हो।
क्या कुछ एहसास जुङे है तुमसे,
या सिर्फ एक सपनों की डोर है।
या कोई चाहत है मेरी तुमसे,
या सिर्फ मेरे अरमानों की भोर है।
क्यूँ चले गये तुम दूर इतना,
पर करीब़ भी कब थे।
जान पाते तुमको तुम्हीं से,
ऐसे नसीब भी कब थे।
बहार आने से पहले,
ये कैसी रुत है आ गयी।
कि फूल खिलने से पहले ही,
ये कली मुरझा गयी।
दोष किसका था यहाँ पर,
जान न पाये हम अब तक।
एक याद बाकी रहेगी दिल में,
साँस बाकी है ये जब तक।
ग़र कोई रिश्ता है मेरा तुमसे,
तो उस रिश्ते की खातिर वापस आ जाओ।
थाम लो मेरा हाथ कुछ पल के लिये,
चाहे फिर हाथ छोङ जाओ।
ग़र तुम हो राज़ी इस वज़ह पर,
तो समझो एक आरज़ू पूरी हो गयी।
न कोई अब गिला रहा किसी से,
मेरी ज़िन्दगी पूरी हो गयी।
--मनीषा--
क्यों मुझे याद आते हो।
क्या रिश्ता है मेरा तुमसे,
क्यों इस कद़र दिल को जलाते हो।
क्या कुछ एहसास जुङे है तुमसे,
या सिर्फ एक सपनों की डोर है।
या कोई चाहत है मेरी तुमसे,
या सिर्फ मेरे अरमानों की भोर है।
क्यूँ चले गये तुम दूर इतना,
पर करीब़ भी कब थे।
जान पाते तुमको तुम्हीं से,
ऐसे नसीब भी कब थे।
बहार आने से पहले,
ये कैसी रुत है आ गयी।
कि फूल खिलने से पहले ही,
ये कली मुरझा गयी।
दोष किसका था यहाँ पर,
जान न पाये हम अब तक।
एक याद बाकी रहेगी दिल में,
साँस बाकी है ये जब तक।
ग़र कोई रिश्ता है मेरा तुमसे,
तो उस रिश्ते की खातिर वापस आ जाओ।
थाम लो मेरा हाथ कुछ पल के लिये,
चाहे फिर हाथ छोङ जाओ।
ग़र तुम हो राज़ी इस वज़ह पर,
तो समझो एक आरज़ू पूरी हो गयी।
न कोई अब गिला रहा किसी से,
मेरी ज़िन्दगी पूरी हो गयी।
--मनीषा--
3 comments:
hats off money........very nice....too gud..........!!!!!
Thanks.......
बहुत बहुत धन्यवाद..........कोशिश तो यही रहेगी कि कुछ और अच्छा लिखूँ अब....!!!
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