हर दिन हो एक खुशनुमा सवेरा,
रोशनी हो बिखरी न हो कहीं अन्धेरा।
न चले अब कभी ग़म की कोई आँधी,
हर तरफ हो बस खुशियोँ का बसेरा॥
सच की जीत हो हमेशा,
और झूठ को प्रायश्चित मिले।
प्रेम का अस्तित्व रहे सदा,
न बैर का कोई फूल खिले॥
रंग, भेद, जाति और धर्म की,
मिट जायें सारी दीवार।
रह जाये इस जग में केवल,
प्रेम, समर्पण और सदाचार॥
सात रंग से रंगा ये जीवन,
सात सुरों सा अविरल बहे।
सात वचन से जुङा हर रिश्ता,
सात जन्म तक साथ रहे॥
क्या खोया क्या पाया किसने,
इस सोंच से हम रहे परे।
छोटी सी आहट भी खुशियोँ की,
मुस्कान बनकर होंठो पर रहे॥
न हो पीढ़ा कि क्या खोया हमने,
न ही उसका कोई विषाद रहे।
इस बार तो हासिल होगा वो,
बस दिल में एक उन्माद रहे॥
कर ले चाहे कोई लाख जतन,
न तोङ सके तेरे मन को।
इस बार भी कर कुछ ऐसा तू,
तू दुनियाँ का सरताज रहे॥
--मनीषा--

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